
ठंडे काँच को काटना क्यों बंद करना चाहिए?
ठंडे काँच को काटना वास्तव में एक जोखिम भरा काम है। जब हम हीरे या कार्बाइड वाले उपकरणों का उपयोग ठंडी सतह पर करते हैं, तो वहाँ बहुत अधिक तनाव पैदा होता है। समस्या यह है कि यदि काँच बहुत ठंडा हो, तो दरारें वैसी ही नहीं बन पातीं; वे अनियमित रूप से फैल जाती हैं। इसी कारण ही काँच में दरारें पड़ जाती हैं, जिससे काँच बेकार हो जाता है। इस समस्या से बचने हेतु हम इन्फ्रारेड ऊष्मा का उपयोग करते हैं। इससे काँच की सतह पहले ही गर्म हो जाती है, जिससे दरारें वैसी ही बन पाती हैं, जैसी हम चाहते हैं।
रहस्य… ऊष्मा में ही है!
इन्फ्रारेड लैंप, काँच के अणुओं में सीधे ऊर्जा पहुँचाते हैं। इससे काँच की चिपचिपाहट कम हो जाती है, और उसमें आंतरिक दरारें नहीं पड़तीं। परिणामस्वरूप, दरारें वैसी ही बन पाती हैं, जैसी हम चाहते हैं।
उपकरणों का चयन
यदि आप कंटेनरों को काट रहे हैं, तो छोटी-तरंगदैर्घ्य वाले इन्फ्रारेड लैंपों का ही उपयोग करें। ऐसे लैंप, मध्यम/लंबी-तरंगदैर्घ्य वाले लैंपों की तुलना में काँच में तेजी से ऊष्मा पहुँचाते हैं। साथ ही, ऐसे लैंपों के लिए बड़े पैमाने पर कन्वेयर सिस्टम की आवश्यकता भी नहीं होती।
लेकिन सावधान रहें!
आपको ऊष्मा की मात्रा एवं लैंपों की दूरी का संतुलन बनाना होगा। अधिक ऊष्मा से काँच में नई दरारें पड़ सकती हैं, और काँच ठंडा होने पर टूट सकता है। आपको अपने सेंसरों का उपयोग करके सही मात्रा में ऊष्मा पहुँचानी होगी।
अंत में…
ध्यान रखें कि पूर्व-ऊष्मीकरण कोई जादुई उपाय नहीं है। यदि आप अत्यधिक ऊष्मा पहुँचाएंगे, तो यह एक समस्या को दूसरी समस्या में बदल देगा। आपको अपने उपकरणों की जाँच अवश्य करनी होगी… ताकि काँच में कोई दरार न पड़े।